Thursday, 22 February 2018

Rajasthan: प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की लापरवाही से चयनित बेरोजगार परेशान

Rajasthan: शिक्षा निदेशालय की लापरवाही से चयनित बेरोजगार परेशान, RTET Result Date का Issue

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Rajasthan News Dated 22/02/2018
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राजस्थान के प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने गत माह 25 जनवरी 2018 को वर्ष 2016 से लंबित तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती( 3rd GRADE Teachers Recruitment 2016) का परिणाम जारी किया था, जिसके बाद जिला परिषदों ने दस्तावेजों का सत्यापन किया | 
भर्ती पिछले 2 साल से सरकार के विभिन्न विभागों के आंतरिक कार्यो तथा लापरवाही के चलते लंबित थी |

शिक्षा निदेशालय की लापरवाही से चयनित बेरोजगार परेशान, RTET परिणाम तिथि का मामला
परिणाम घोषणा के बाद जिला परिषदों में दस्तावेज सत्यापन के दौरान कई अभ्यर्थियों को RTET बी.एड/STC से पहले उत्तीर्ण होने के कारण अपात्र घोषित कर दिया गया जिसके लिए शिक्षा निदेशालय के नियमो का हवाला दिया गया है, वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि मूल भर्ती विज्ञापन में ऐसी कोई शर्त नही थी, बाद में इस नियम को शामिल किया गया है जोकि पूर्णत अनुचित है |
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फर्स्ट खबर को प्राप्त जानकारी के अनुसार अभ्यर्थी इस मामले को लेकर न्यायालय का रुख भी कर चुके है, और माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने अभ्यर्थियों के हित में फैसले देते हुए कहा था कि सरकार/निदेशालय कि ये शर्त पूर्णत अवैध है तथा निदेशालय को आदेश भी दिया था कि निदेशालय बीकानेर ऐसे अभ्यर्थियों के हित में फैसला ले |
REET बोर्ड ने RTI  में माना, लेकिन शिक्षा निदेशालय कोर्ट की भी नही सुन रहा 
इसी भर्ती के एक चयनित अभ्यर्थी का कहना है कि REET बोर्ड से सूचना का अधिकार के माध्यम से पूछा गया कि RTET 2011 के परिणाम कि कोनसी तिथि मान्य होगी क्योंकि वर्ष 2011 RTET परीक्षा का परिणाम दोबारा जारी किया गया था, बोर्ड ने अपने जवाब में कहा है कि – भर्ती तथा नियोक्ता एजेंसी दोनों के लिए संशोधित तिथि ही मान्य होगी तथा पूर्व कि तिथि को निरस्त माना जायेगा |
अभ्यर्थी ने बताया कि उसने RTI कि प्रति कई बार शिक्षा निदेशालय को डाक द्वारा व खुद जाकर प्रार्थना सहित प्रस्तुत की है लेकिन कोई नही फायदा नही हुआ, अभ्यर्थी ने यह भी बताया कि उसने माननीय न्यायालय में याचिका लगाई और हित में फैसला आने के बावजूद भी शिक्षा निदेशालय ने आदेश जारी नही किये जिसके चलते जिला परिषद ने अपात्र घोषित कर दिया |
आखिर गलती किसकी , सरकार या छात्र
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अब सोचना यह चाहिए कि ये तिथि का मामला आखिर बनता कैसे है, और गलती किसकी है |
  • बी.एड APPEARING छात्रो को RTET के परीक्षा में बैठने कि अनुमति सरकार ने ही दी थी तो फिर अभ्यर्थियों के गलती कैसे |
  • जब बोर्ड ने RTET-11 को परिणाम ही नये सिरे से घोषित किया तो पुराणी तिथि कैसे मान्य ?
  • अगर बोर्ड के RTET- 11 के संशोधित परिणाम कि तिथि मान्य नही तो इसी तर्क से भर्ती का संशोधित विज्ञापन और उसकी नई शर्ते कैसे मान्य ?
  • RTI से प्राप्त सूचना के बाद भी शिक्षा निदेशालय क्यों नही निर्देश कर रहा ?
  • क्या सरकार के बाबुओं कि गलती छात्र ही भुगतेंगे

Source - First Khabar News

Monday, 22 January 2018

27 आप MLA’s पर नही चलेगा लाभ का पद मामला, EC ने किया साफ़

दिल्ली के अस्पतालों में रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन और सदस्य का पद लाभ का पद नहीं, राष्ट्रपति के आदेश में चुनाव आयोग ने अपनी सिफारिश में किया इसका जिक्र।
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Delhi News Dated 22/01/2018
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रोगी कल्याण समिति के अधिकार
  • अस्थाई कर्मचारियों की भर्ती का अधिकार (इसमें डॉक्टर भी शामिल है)
  • दो लाख रुपये तक के निर्माण कार्य का काम समिति अध्यक्ष की मंजूरी से.
  • अस्पताल परिसर में दुकान किराए या लीज पर देने का अधिकार जिसकी कमाई समिति के पास आती है.
दिल्ली सरकार के सूत्रों के मुताबिक 
  1. लाभ के पद के दायरे में रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष का पद नहीं आता.
  2. दिल्ली विधायक अयोग्यता निवारण कानून 1997 में इस पद को लाभ के पद के दायरे बाहर किया गया है.
  3. पॉइंट 11 में जो हॉस्पिटल एडवाइजरी कमिटी है उसको 2009 में शीला दीक्षित ने नाम बदलकर रोगी कल्याण समिति कर दिया था.
  4. पॉइंट 14 के मुताबिक सरकार की बनाई किसी भी सोसाइटी के अध्यक्ष का पद लाभ के पद के दायरे से बाहर होगा (रोगी कल्याण समिति भी एक सोसाइटी है).
क्या है पूरा मामला?
दरअसल कानून के एक विद्यार्थी विभोर आनंद ने चुनाव आयोग को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 27 आप विधायक रोगी कल्याण समिति में अध्यक्ष के पद पर होने के नाते लाभ के पद पर हैं लिहाजा इनकी विधायकी रद्द की जाए।शिकायत में कहा गया है कि रोगी कल्याण समिति के  में विधायक सदस्य के तौर पर तो हो सकता है लेकिन अध्यक्ष के पद पर नहीं।
आप के 27 विधायक रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष और सदस्य थे। इन पर कथित ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का आरोप था जोकि दिल्ली के एक वकील/नागरिक द्वारा लगाया गया था लेकिन अब चुनाव आयोग ने अपनी सिफारिश में साफ़ किया है कि रोगी कल्याण समिति में चेयरमैन/ वाईस चेयरमैन का पद पहले से ही लाभ का पद से बाहर है |
कौन हैं ये 27 विधायक
  1. अल्का लाम्बा- चांदनी चौक
  2. शिव चरण गोयल- मोती नगर
  3. बन्दना कुमारी- शालीमार बाग
  4. अजेश यादव- बादली
  5. जगदीप सिंह- हरी नगर
  6. एस के बग्गा- कृष्णा नगर
  7. जीतेन्द्र सिंह तोमर- त्री नगर
  8. राजेश ऋषि- जनकपुरी
  9. राजेश गुप्ता- वज़ीरपुर
  10. राम निवास गोयल- शाहदरा
  11. विशेष रवि- करोल बाग
  12. जरनैल सिंह- तिलक नगर
  13. नरेश यादव- मेहरौली
  14. नितिन त्यागी- लक्ष्मी नगर
  15. वेद प्रकाश- बवाना
  16. सोमनाथ भारती- मालवीय नगर
  17. पंकज पुष्कर- तिमारपुर
  18. राजेंद्र पाल गौतम- सीमापुरी
  19. कैलाश गहलोत- नजफ़गढ़
  20. हज़ारी लाल चौहान- पटेल नगर
  21. शरद चौहान- नरेला
  22. मदन लाल- कस्तूरबा नगर
  23. राखी बिड़लान- मंगोलपुरी
  24. मोहम्मद इशराक- सीलमपुर
  25. अनिल कुमार बाजपाई- गांधी नगर
  26. कमांडो सुरेंद्र- दिल्ली कैंट
  27. महेंद्र गोयल- रिठाला
ख़ास बात ये है कि इन 27 विधायकों में 10 विधायक ऐसे है जो पहले से संसदीय सचिव बनाये जाने पर लाभ के पद के आरोप में विधायकी जाने का खतरा झेल रहे हैं
पढिये आदेश के कॉपी :-

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